Don't Miss
Home 5 देश 5 जब प्रेस कॉन्फ्रें स के बिल पर लड पडे वरिष्ठ नेता

जब प्रेस कॉन्फ्रें स के बिल पर लड पडे वरिष्ठ नेता

मध्‍यप्रदेश में सत्‍ता विरोधी लहर अच्‍छी-खासी है. लोग भाजपा से गुस्साए हैं और कांग्र्रेस को वोट देना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस इसके लिए तैयार ही नहीं है. आलम ये है कि यहां नेता ही आपस में भिड़े हुए हैं. इससे जुड़े कुछ मजेदार किस्से प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में और इसके बाहर सुनने को मिलते हैं.

ऐसा ही किस्‍सा है वरिष्‍ठ कांग्रेसी नेता कमलनाथ और कांग्रेस के युवा लोकप्रिय चेहरे ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया का. प्रदेश कांग्रेसके संगठन की बागडोर संभालने के बाद कमलनाथ ने एक प्रेस कांफ्रेंस की, जिसका बिल साढ़े छह लाख रुपए आया और इसका भुगतान पार्टी फंड से किया गया. लेकिन जब सिंधिया ने प्रेस कांफ्रेंस की, तो उसका साढ़े चार लाख रुपए का बिल यह कह कर वापस करा दिया गया कि वे खुद पेमेंट करें. कहना जरूरी न होगा कि इस वाकये के बाद दोनों नेताओं के बीच अघोषित रूप से नाराजगी पैदा हो गई है.

ऐसा ही दूसरा मामला हुआ देपालपुर में कार्यकर्ताओं की सभा को लेकर. 12 सितंबर को देपालपुर में सिंधिया ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया, जिसमें करीब 5000 लोग पहुंचे. इस कार्यक्रम को हफ्ता भर भी नहीं बीता और देपालपुर में ही कमलनाथ ने किसी अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता के लिए सभा कर दी, जिसमें सिंधिया की सभा से ज्यादा लोग पहुंच गए. इस वाकये के बाद तो दोनों नेताओं के बीच खींचतान और बढ़ गई.

दोनों नेताओं के बीच विवाद गहराने में एक घटना और योगदान रहा. पन्ना के पास पवई में एक सभा में सिंधिया ने मुकेश नायक को कैंडिडेट घोषित कर दिया, जिसे लेकर कमलनाथ ने तुरंत कहा कि कोई भी नेता ऐसा नहीं कर सकता है. कैंडिडेट का सेलेक्शन केवल हाईकमान ही करेगा. यानि कि कांग्रेस में अंर्तकलह की जो परंपरा रही है, उससे ये दोनों नेता भी अछूते नहीं रहे, बल्कि उस पंरपरा को आगे बढाते ही नजर आ रहे हैं.

खैर, इस सबसे फायदा हुआ है अजय सिंह राहुल भैया को. कहा जाता है कि कमलनाथ की सिंधिया के साथ तनातनी बढ़ने के बाद अब अजय सिंह को पीसीसी में काफी बुलाया जाने लगा है. वरना इससे पहले तक पीसीसी से बमुश्किल एक फर्लांग की दूरी पर रहने वाले अजय सिंह कभी-कभार ही पीसीसी में दिखते थे.

x

Check Also

सीबीआई चीफ बने रहेंगे आलोक वर्मा, बड़े फैसले लेने पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

सीबीआई विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया सीबीआई विवाद मामले में आज सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। फैसले से जहां केंद्र सरकार को झटका लगा है वहीं जांच एजेंसी के निदेशक वर्मा को भी पूरी तरह से राहत नहीं मिली है। सीबीआई निदेशक ने सरकार द्वारा उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। आज इस मामले में उन्हें 75 दिन बाद राहत मिली है। अदालत ने सरकार के 23 अक्तूबर को दिए आदेश को निरस्त कर दिया है लेकिन यह भी कहा है कि सीवीसी जांच पूरी होने तक वर्मा कोई बड़ा निर्णय ...

Christmas day 2018: जानिए क्या है क्रिसमस ट्री और सीक्रेट सांता क्लॉज की कहानी

क्रिसमस को पूरी दुनिया में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसे बड़ा दिन के भी नाम से जाना जाता है। नई दिल्ली, जेएनएन। क्रिसमस डे ईसाई धर्म के लोगों का प्रमुख पर्व है। यह पर्व विश्व में फैले ईसा मसीह के करोड़ों अनुयायियों के लिए पवित्रता का संदेश लाता है। इन दिनों हर जगह क्रिसमस डे की रौनक है। क्रिसमस को पूरी दुनिया में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसे ‘बड़ा दिन’ के भी नाम से जाना जाता है। क्रिसमस का पर्व प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन प्रभु ...

अयोध्या मामले पर चार जनवरी को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की यह तीन सदस्यीय पीठ इसी मामले में 2010 में आए इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली 14 याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक से जुड़े मामले में चार जनवरी को सुनवाई करेगा। सुनवाई प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस एसके कौल की पीठ करेगी। माना जा रहा है कि इसी दिन पीठ इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय पीठ के गठन का फैसला करेगी।सुप्रीम कोर्ट की यह तीन सदस्यीय पीठ इसी मामले में 2010 में आए इलाहाबाद हाई कोर्ट ...

EXCLUSIVE: पासवान बोले- मैं गुडलर्क चार्म, 2019 में फिर बनेगी मोदी सरकार

चिराग के संसदीय क्षेत्र में भी लोग नोट बदलने के लिए लाइन लगा रहे थे तो उसने कुछ जानकारी मांगी थी। वह दौर खत्म हो चुका है। लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) अध्यक्ष और केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान को विपक्षी नेता मौसम वैज्ञानिक कहते हैं जो माहौल को पहचान कर निर्णय लेते हैं। खुद पासवान का दावा है कि वह गुडलक चार्म हैं, जिसके साथ होते हैं बाजी उनकी होती है। पिछले कुछ दिनों की राजनीतिक उलझनों, सवालों और अटकलों के बाद उनकी पार्टी ने फैसला लिया है कि वह राजग में ही बरकरार रहेंगे। एक तेजतर्रार राजनीतिज्ञ की तरह ...