नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर को जस्टिस बी एन श्रीकृष्णा समिति ने बैंक के आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया है। ऐसे में कोचर का इस्तीफा उनकी बर्खास्तगी का कारण बन सकती है और बैंक उनके बोनस समेत अन्य लंबित भुगतान पर रोक लगा सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘चंदा कोचर ने आईसीआईसीआई की आचार संहिता, हितों के टकराव को रोकने वाले फ्रेमवर्क और अपने कर्तव्यों का उल्लंघन किया।’

इसके साथ ही बैंक ने कोचर को अप्रैल 2009 से लेकर मार्च 2018 के बीच दिए गए बोनस को सूद समेत वापस लेने का फैसला लिया है।

करीब एक हफ्ते पहले ही सीबीआई ने वीडियोकॉन लोन मामले में कई जगहों पर छापा मारते हुए चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया था। कोचर के खिलाफ वीडियोकॉन समूह को दिए गए 3,250 करोड़ रुपये के लोन में अनियमितता बरतने का आरोप है। माना जा रहा है कि सीबीआई इन्हें जल्द ही पूछताछ के लिए बुला सकती है।

गौरतलब है कि 2012 में आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से वीडियोकॉन समूह को मिले 3,250 करोड़ रुपये के लोन के बाद वीडियोकॉन के प्रोमोटर वेणुगोपाल धूत ने कथित रूप से न्यूपावर में करोड़ों रुपये का निवेश किया।

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न्यूपावर कंपनी पर आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और सुप्रीम पावर का संयुक्त मालिकाना हक है।

मामला सामने आने के बाद सीबीआई ने वेणुगोपाल धूत, दीपक कोचर और अज्ञात लोगों के खिलाफ पिछले साल मार्च में प्राथमिक जांच (पीई) दर्ज की थी।

बुधवार को कंपनी ने तीसरी तिमाही के नतीजे भी जारी किए हैं।  दिसंबर तिमाही में बैंक का मुनाफा 2.75 फीसद कम होकर 1604.91 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की इसी तिमाही में बैंक ने 1650.24 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।